समस्तीपुर/चकमेहसी:चकमेहसी थाना क्षेत्र में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शराब तस्करी की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम को झोपड़ीनुमा घर से शराब नहीं, बल्कि नोटों के अंबार मिले। सड़क किनारे बने एक अस्थायी घर से करीब 44 लाख रुपये नकद बरामद होने के बाद यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, चकमेहसी थानाध्यक्ष मनीष कुमार को सैदपुर बाजार समिति के समीप एक झोपड़ीनुमा घर में शराब छिपाए जाने की पुख्ता सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल छापेमारी की गई। तलाशी के दौरान शराब तो नहीं मिली, लेकिन एक कार्टन में रखे झोले से बड़े-बड़े बंडलों में नकद रुपये निकलते चले गए। देखते ही देखते मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।
भारी मात्रा में नकदी मिलने की खबर मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई। सदर-2 एसडीपीओ संजय कुमार, अंचलाधिकारी शशि रंजन, सदर इंस्पेक्टर नीरज तिवारी और पूसा थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। वहीं, खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जुट गए, जिसे नियंत्रित करने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी।
अंचलाधिकारी शशि रंजन की निगरानी में नोट गिनने की मशीन मंगाई गई। पूरी प्रक्रिया पुलिस अभिरक्षा में हुई और हर कदम की वीडियोग्राफी कराई गई। गिनती पूरी होने पर कुल 43 लाख 94 हजार 500 रुपये नकद बरामद होने की पुष्टि हुई। इसके बाद बरामद राशि को विधिसम्मत तरीके से जब्त कर लिया गया।
पुलिस ने झोपड़ी में रहने वाले युवक से बरामद नकदी के स्रोत को लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और उससे आय से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। फिलहाल नकदी को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में चकमेहसी थाने के मालखाने में सुरक्षित रखा गया है।
मामले की संवेदनशीलता और भारी रकम की बरामदगी को देखते हुए देर शाम एसपी अरविंद प्रताप सिंह स्वयं चकमेहसी पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से पूरी कार्रवाई की जानकारी ली। एसपी ने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि नकदी के स्रोत को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामले की जांच और गहराई से की जाएगी।
अब इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या यह रकम शराब कारोबार से जुड़ी है या किसी अन्य अवैध गतिविधि का हिस्सा? पुलिस इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है। इलाके में यह कार्रवाई आने वाले दिनों तक चर्चा और सख्त निगरानी का विषय बनी रहने वाली है।चकमेहसी थाना क्षेत्र में हाल ही में की गई पुलिस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकद राशि की बरामदगी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में सामने आई है। यह कार्रवाई शराब की गुप्त सूचना के आधार पर प्रारंभ की गई थी, किंतु तलाशी के दौरान नकदी का मिलना यह दर्शाता है कि कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां अब केवल एक आयाम तक सीमित नहीं रहीं।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पुलिस द्वारा सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करना, वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर बुलाना, नोट गिनने की मशीन से नकदी की गणना कराना तथा पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराना—ये सभी कदम पारदर्शिता और विधिसम्मत कार्यवाही के उदाहरण हैं। बरामद राशि को मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में मालखाने में सुरक्षित रखना भी स्थापित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप है।
हालांकि, किसी भी बड़ी नकदी बरामदगी के मामले में केवल जब्ती ही पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। कानून का उद्देश्य यह भी है कि राशि के स्रोत, उपयोग और वैधता की निष्पक्ष जांच की जाए। संबंधित व्यक्ति से आय संबंधी दस्तावेजों की मांग इसी दिशा में एक आवश्यक और स्वाभाविक कदम है।
बिहार जैसे राज्य में, जहां शराबबंदी लागू है, वहां अवैध गतिविधियों के स्वरूप में बदलाव देखा गया है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह केवल प्रत्यक्ष अपराध तक सीमित न रहे, बल्कि उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी समान रूप से ध्यान दे। नकदी से जुड़े मामलों की गंभीरता इसीलिए अधिक होती है, क्योंकि इनमें कई स्तरों पर जांच की आवश्यकता पड़ती है।
इस पूरे प्रकरण में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सक्रियता यह संकेत देती है कि प्रशासन मामले को हल्के में नहीं ले रहा है। अब यह अपेक्षा की जाती है कि जांच पूरी निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता और कानून के दायरे में रहकर की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की शंका या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
अंततः, ऐसी घटनाएं प्रशासन के लिए आत्ममंथन का अवसर भी होती हैं। पारदर्शी जांच, समयबद्ध कार्रवाई और निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया ही जनविश्वास को मजबूत करती है। चकमेहसी की यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि सुशासन केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पूर्ण जांच से स्थापित होता है। गौरतलब है कि चकमेहसी में नकदी बरामदगी की घटना यह स्पष्ट करती है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में आर्थिक पहलुओं की जांच भी उतनी ही आवश्यक है। पुलिस द्वारा पारदर्शी तरीके से की गई कार्रवाई सराहनीय है। अब यह अपेक्षा की जाती है कि बरामद राशि के स्रोत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए, ताकि जनविश्वास बना रहे और कानून का उद्देश्य पूर्ण हो।